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विश्व जल दिवस: स्वास्थ्य औऱ स्वच्छता सुविधाएं

इस तरह मनायें विश्व जल दिवस

Theme 2020 (जल दिवस) : Water and Climate Change

विश्व जल दिवस हर साल मनाया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है जो स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल के लिए लोगों में जागरूकता निर्माण करने में मदद करता है. इस वर्ष का जल दिवस जल और जलवायु परिवर्तन की कड़ी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.

यूएन (संयुक्त राष्ट्र) कहता है: “पानी को अच्छी तरह अपनाने से स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा होगी. “पानी एक ऐसी कीमती वस्तु है जिसका सभी उपयोग करते हैं.

यह दिवस हमें उन लोगों और जगहों के बारे में सोचने का एक मौका है जहां पानी की अभी भी कमी हैं, इस बात पर समाधान खोजने के लिए हम सब को साथ में काम करना होगा.

जल दिवस का इतिहास

यह अत्यंत दुखद लेकिन सत्य है: दुनिया भर में 783 मिलियन लोग ऐसे हैं जिनके पास अब भी साफ पानी नहीं है. जबकि दुनिया भर में 2.5 मिलियन से अधिक लोगों को अब भी पर्याप्त स्वच्छता और सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई है.

पहला जल दिवस पर्यावरण और विकास पर 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित यूएन सम्मेलन के एजेंडा में प्रस्तावित किया गया था. उसी वर्ष दिसंबर में, यूएन की महासभा ने एक प्रस्ताव पारित किया गया जो वैश्विक जल-संबंधी मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए और स्वच्छ पानी की आपूर्ति हेतु प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को जल दिवस आयोजित किया जाएगा.

22 मार्च 1993 में पहला विश्व जल दिवस आयोजित किया गया था.विश्व भर में चल रहे स्वच्छ जल और स्वच्छता संकट से निपटने के लिए ही यूएन ने जल दिवस की स्थापना की. जल दिवस का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ पानी के साथ स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि दुनिया भर में अलग अलग लोगों एवं समुदायों की मदद और समर्थन से इस संकट पर ध्यान आकर्षित कर सकें.

यह दिवस इस बात पर भी ध्यान केंद्रित करता है कि सामान्य लोग एक दूसरे को उनकी गरिमा को वापस लाने में कैसे मदद कर सकते हैं, साथ ही स्वच्छ, सुरक्षित पानी के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य में सुधार सकते हैं.

जल दिवस और स्वच्छता सुविधाएं आपस में कैसे जुड़ी हुई है

UN जल दिवस के लिए प्रत्येक वर्ष एक थीम चयनित करता है और इस थीम पर ही यह दिवस केंद्रित होता है. 22 मार्च 2020 के जल दिवस का विषय:  ‘जल और जलवायु परिवर्तन’ इस वर्ष का जल दिवस जल और जलवायु परिवर्तन के बीच घनिष्ठ संबंध पर केंद्रित है और देखता है कि हम बिगड़ते हालातों पर काबू पाने के लिए वैश्विक समुदाय के रूप में कार्रवाई करने का इंतजार नहीं कर सकते.

यूएन ने इस बात की ओर विश्व का ध्यान आकर्षित किया है कि चरम मौसम की घटनाओं ने पानी को अधिक दुर्लभ, अधिक अप्रत्याशित और अधिक प्रदूषित बनाना शुरू कर दिया है. उन्होंने यह भी बताया है कि कैसे हमें, एक समाज के रूप में, जीवित रहने के लिए पानी की आवश्यकता होती है और हम अपने स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, व्यवसाय और कई उद्योगों सहित कई तरह की प्रणालियों पर पानी की उपलब्धता के तौर पर निर्भर करते हैं.

यूएन ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई कार्य औऱ योजनाएं सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं और उन्हें प्रभावी साबित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में एकता की आवश्यकता है, तभी वह एक संभव प्रयास हो सकता है. आज भी कई गांव और शहर ऐसे है जहाँ पानी और स्वच्छता सुविधाएं यही सबसे बड़ी चुनौती है और मानवी जीवन को बहोत ज्यादा प्रभावित कर रही है. उनपर पर्याप्त व्यवस्था में प्रतिबंध लगाने से ही कुछ राहत मिल सकती है.

दोस्तों, इस तरह से हमें पानी के मूल्य को समझकर हर संभव प्रयास करना चाहिए क्योंकि पानी और जलवायु परिवर्तन एक दूसरे पर ही निर्भर करते है, जिससे हमारा यह पूरा जैविक इको सिस्टम चलता रहता है. आख़िरकार इसके परिणाम स्वरूप ही तो हम सबकी जिंदगी को एक नया आयाम स्थापित हुआ है. 

© संतोष साळवे
एस सॉफ्ट ग्रुप इंडिया