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what is veto power | वीटो पावर क्या होता है?

veto power : वीटो शक्ति का मतलब होता है निषेधाज्ञा अथवा निषेध अधिकार. इसके अलावा दूसरे शब्दों में कहें तो veto power meaning किसी प्रस्ताव को पारित होने से रोकने अथवा मना करने की शक्ति कह सकते हैं.

अब आपके मन में यह सवाल आया होगा कि ये कौनसे के प्रस्ताव को पारित करने की बात चल रही है? तो हम आपको बता दें की ये संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव की बात है.

संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन दूसरे विश्व युद्ध के बाद 24 अक्टूबर 1945 को किया गया था. 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस और पोलियो दिवस भी मनाया जाता है.

संयुक्त राष्ट्र united nations के मुख्य रूप से 6 अंग है.

1. सचिवालय | secretariat

2. महासभा | general assembly

3. सुरक्षा परिषद | security council

4. प्रन्यास परिषद | trust council

5. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद | economic and social council

6. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय | international court of justice

इनमें से एक संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रन्यास परिषद का कार्य समाप्त हो चुका है और वह अभी अक्रियाशील हो चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय न्यूयॉर्क में नहीं बल्कि नीदरलैंड के हेग में है.

veto power kisne banayi

united nations security council (unsc) : संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद को ‘दुनिया का सिपाही’ अर्थात ‘दुनिया की पुलिस’ कहते हैं. क्योंकि पूरी वैश्विक शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं के पास होती है.

सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश होते हैं. उनमें 5 स्थाई सदस्य | permanent members और बाकी 10 अस्थाई सदस्य | temporary members होते हैं.

veto power countries

5 स्थाई सदस्य देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन तथा फ्रांस है.

इन्हीं 5 स्थाई सदस्य देशों को वीटो पावर हासिल है. जो अस्थाई सदस्य देश होते हैं उनका चुनाव महासभा द्वारा 2 वर्ष के लिए किया जाता है. इसके लिए महासभा के सदस्य देशों का दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है.
हर एक सदस्य देश का एक वोट होता है.

किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए 15 सदस्यों में से कम से कम 9 सदस्य का सकारात्मक वोट आवश्यक होता है.


veto power of president country

इन सभी सकारात्मक वोटों में सभी स्थाई सदस्य देशों का सकारात्मक वोट आवश्यक होता है. अर्थात इनमें ऐसा कोई स्थाई सदस्य का वोट नहीं होना चाहिए जो प्रस्ताव के खिलाफ हो.

किसी प्रस्ताव के खिलाफ यदि कोई स्थाई सदस्य देश नकारात्मक वोट करता है, तो इसका अर्थ है कि उसने अपने वीटो शक्ति का प्रयोग किया है. अर्थात उसने उस प्रस्ताव को मना किया है.

ऐसी स्थिति में 15 में से 14 देशों के समर्थन के बावजूद भी वो प्रस्ताव पारित नहीं हो सकेगा.


वीटो शक्ति facts

– सर्वप्रथम वीटो पावर का प्रयोग united states of America ने किया था.

– इसका सर्वाधिक 100 से भी अधिक ज्यादा बार रूस ने प्रयोग किया है. तथा सबसे कम बार चीन ने वीटो शक्ति का प्रयोग किया है.

– भारत भी संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद | unsc की स्थाई सदस्यता हासिल करने का प्रयास कर रहा है.

veto power हासिल करने के लिए भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील ने G4 नामक एक संगठन भी बनाया है.


आशा है कि अब आपको यह ध्यान में आ चुका होगा कि भारत के लिए वीटो पावर क्यों जरूरी है

✍🏼 संतोष साळवे
एस सॉफ्ट ग्रुप इंडिया


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