Zero Discrimination Day | शून्य भेदभाव दिवस – 1 March

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zero discrimination day : आज 1 मार्च के दिन हम सब zero discrimination day | शून्य भेदभाव दिवस मनाने जा रहे हैं. आपको पता होगा कि हर साल 1 मार्च को zero discrimination day हम सभी के जीवन को एक गरिमा का अधिकार देता है. क्योंकि इसमें पूर्ण तहा उत्पादक जीवन की जीवन शैली शामिल होती है. साथ ही हमें यह भी याद रखना होता है कि किसी भी प्रकार के संभावित भेदभाव को समाप्त करने के लिए करुणा एवं परिवर्तन का एक आंदोलन जरूर करना पड़ता है.

और इसी बात को हमें हमेशा याद रखते हुए सामाजिक स्थिति के आधार पर या फिर नस्ल, धर्म और लिंग के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए. अगर कोई इस तरह से भिन्न-भिन्न धर्म, उम्र, लिंग या फिर नस्ल के आधार पर कोई अलग अलग व्यवहार करता है तो उसे सामाजिक भेदभाव कहां जा सकता है. और अफसोस की बात यह है कि आज भी इसी तरह का व्यवहार कई देशों में और समाज में किया जाता है. इसी वजह से अब यह एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है क्योंकि यह सामाजिक उन्नत सभ्यता में भी पूरी तरह से उतर चुका है.

आपने देखा होगा कि कई सारे मामलों में भेदभाव एक व्यवहार की तरह ही सिखाया जाता है. क्योंकि इसके खिलाफ और सुरक्षित तार एवं भेदभाव की शक्ति अनुमति को गर्व माना जाता है. और इसमें गर्व इंसान का बहुत बड़ा भेदभाव का कारण हो सकता है. क्योंकि हम जब भी किसी की बात को सुनते नहीं है या फिर अनदेखा करते हैं तो हमारे मन में उसके प्रति गर्व का निर्माण हो जाता है. और इसी वजह से अब हमें वैश्विक मुद्दे पर एक साथ आते हुए इसके खिलाफ एक बहुत बड़े आंदोलन की जरूरत आन पड़ी है.


zero discrimination day ka itihas

zero discrimination day | शून्य भेदभाव दिवस पर इस दिवस के इतिहास के बारे में हम अधिक जानकारी लेंगे. हम आपको इस देश के बारे में बताना चाहते हैं कि पहला शून्य भेदभाव दिवस दिसंबर 2013 में विश्व एड्स दिवस के तौर पर आयोजित किया गया था. लेकिन उसके अगले ही वर्ष के साथ बाद यूएन एड्स के कार्यकारी निदेशक मिशेल सिदीबे इन्होंने इसे बदल दिया. और फिर zero discrimination day तारीख 1 मार्च कर दी गई. इसी तरीके से इसे पूरी दुनिया में हर साल मनाया जाने लगा.

हम आपको पिछले वर्षों के शुन्य भेदभाव दिवस के आयोजन के बारे में जानकारी देना चाहते हैं. 2020 में उसे महिलाओं एवं लड़कियों के खिलाफ zero discrimination day के तौर पर मनाया गया था. और इससे पहले 2019 में इसे कानून को बदलने के अधिनियम के नाम पर मनाया गया था. इसी तरीके से 2016 में इसे स्टैंड आउट और 2015 में ओपन अब रीच आउट इस नाम से मनाया गया था. आपको हम बताना चाहते हैं कि यूएन संगठन इस दिवस पर कई तरह से अलग-अलग गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं.

और साथ ही भी दुनिया में कई तरह के सामाजिक भेदभाव जैसे राष्ट्रीयता जातीयता त्वचा का रंग ऊंचाई पेशा वजन जैसे भेदभाव को विरोध करता है. ताकि सभी लोगों में एक दूसरे के प्रति विश्वास उत्पन्न हो सके और उन्हें भी अपनी जिंदगी जीने का अधिकार मिल सके. लेकिन साथ ही आपको यह भी बात पता होगी कि कई देशों में इस भेदभाव के खिलाफ कानून भी बने हुए हैं. और इसी वजह से हमेशा हम सभी को इसके खिलाफ डटकर खड़े रहना चाहिए.

zero discrimination day kaise manaye

zero discrimination day | शून्य भेदभाव दिवस और हम आपको दिवस को कैसे मनाना है इसके बारे में जानकारी देना चाहते हैं. इस दिवस पर आप व्यापक रूप से भेदभाव को मिटाने की प्रतिज्ञा कर सकते हैं. ताकि आप सभी लोगों के मन में एक दूसरे के प्रति अच्छी भावना को उत्पन्न न कर सके.

और साथ ही अगर आप एक दिवस के प्रति सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में काम कर रहे हैं तो आप इस काम को हमेशा यूं ही जारी रखें. और साथ ही अगर आपको यह बात भी लगे कि आपके दोस्त भी इस काम में आपके साथ हो सकते हैं तो उन्हें उसके लिए जरूर साथ में ले.

क्योंकि आपको यह बात पक्की पता होना चाहिए कि यह दिवस हम सभी को बड़े और मुकम्मल तौर पर मनाने के लिए एक साथ भेदभाव के विरुद्ध खड़ा होना ही चाहिए. तभी हम अपने जीवन में सभी लोगों को एक समान रूप से देख सकेंगे और सभी के प्रति आदर व्यक्त कर सकेंगे. अगर आप इस दिवस को सोशल मीडिया पर भी मांगना चाहते हैं तो आप #zerodiscriminationday को जरूर टैग करें.


हमारा यह zero discrimination day पर आधारित लेख अगर आपको पसंद आया है और साथ ही आपने इस दिवस पर किसी के प्रति भेदभाव ना करने की शपथ ली हो, तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करते हुए जरूर बताएं.


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