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ऐनी फ्रैंक: एक छोटी बच्ची जिसने दुनिया को लिखने का महत्व बताया..

दोस्तों, बचपन से आजतक आपने लेखन (Writting) के कई फायदे सुने होंगे, लेकिन इसी बारे में हम एक और जानकारी देना चाहेंगे जो की काफी महत्वपूर्ण है. यह लेख एक यहूदी लड़की ऐनी फ्रैंक के बारे में है जिसकी डायरी काफी लोकप्रिय हुयी थी तो चलिए आगे पढ़ते है..

ऐनी फ्रैंक कौन थी?

ऐनी फ्रैंक एक यहूदी लड़की थी जो 1929 में जर्मनी में जन्मी थी. वह द्वितीय विश्व युद्ध (1939 -1945) की अवधि के दौरान उसके द्वारा लिखी (Writting) गई डायरी के लिए प्रसिद्ध हुई.

Anne Frank at school in 1940
Anne Frank at school in 1940
Photo: Unknown photographer; Collectie Anne Frank Stichting Amsterdam (Website Anne Frank Stichting, Amsterdam) [Public domain], via Wikimedia Commons

जर्मनी के शासक एडोल्फ हिटलर को यहूदियों से नफरत थी. यहूदी एक प्रकार की नस्लीय जाति है जिसे हिटलर द्वारा हीन माना जाता था. उसने आदेश पारित किया कि जर्मनी के सभी यहूदी मारे जाने वाले हैं. ऐनी फ्रैंक और उनके परिवार ने लगभग दो साल तक अपने पिता के ओटो फ्रेंक के कार्यालय में एक गुप्त एनेक्सी (आश्रय) लिया.

“No one who doesn’t write can know how fine it is. And if I don’t have the talent to write for newspapers or books, well then I can always go on writing for myself”

– Anne Frank, 5th April 1944

इस छिपने की अवधि के दौरान, एनी के पिता ने उसे 13 वें जन्मदिन पर अपनी डायरी भेंट की. एनी ने गुप्त एनेक्सी में घटनाओं के बारे में लिखा, उसकी भावनाओं और विचारों के अलावा उसने छोटी कहानियां लिखीं और किताबों से पैसेज की नकल की. “Book of Beautiful Sentences“.

लेखन (Writting) हमें अपना समय गुजारने में मदद करता है..

हिटलर के एकाग्रता शिविर में ऐनी और उसके परिवार की मृत्यु हो गई, केवल उसके पिता बच गए. ऐनी के लेखन में उनके पिता, ओटो फ्रैंक पर गहरी छाप थी. उन्होंने उस डायरी को अमेरिका को दे दिया, जिसे बाद में “डायरी ऑफ़ अ यंग गर्ल” नाम से प्रकाशित किया गया था.

Anne Frank House Amsterdam
Anne Frank House Amsterdam

1942 से 1944 तक फ्रैंक्स, एक अन्य यहूदी परिवार और एक यहूदी दंत चिकित्सक के साथ, कार्यालय की इमारत में एक गुप्त एनेक्स में छिपे रहे. जहां ऐनी के पिता ने व्यवसाय का संचालन किया था. 1944 में गेस्टापो द्वारा उन्हें पकड़ लिया गया और उन्हें एकाग्रता शिविरों में भेज दिया गया.
उनकी डायरी का 70 भाषाओं में अनुवाद किया गया है. जिस स्थान पर उन्होंने गुप्त आश्रय लिया, उसे “एनी फ्रैंक हाउस” नाम के संग्रहालय में बदल दिया गया. हर साल यहाँ लाखों पर्यटक आते हैं.

ऐनी को अक्सर उसकी बहन चिढ़ाती थी की उसकी कहानियाँ प्रकाशित होने के लिए इतनी अच्छी नहीं है.
ऐनी ने तभी जवाब दिया “मैं खुद के लिए लिख रही हूं

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अभिप्राय: एनी के लिखे लेख से दुनिया को पता चला की हिटलर ने कितने अत्याचार खून और पीड़ा दी मानव जाति को. किसी एक का लिखा हुआ हजारों करोड़ों को एक नई राह प्रदान कर सकता है. कलम और कुर्बानी से ही भारत ने आजादी हासिल की थी. सामान्य से विश्वविख्यात हस्ती होने का सफर लिखने से ही शुरू होता है. यदि एक अच्छी किताब पढ़ना आत्मा का भोजन है तो अपने विचारों को लिखना आत्मा की तृप्ति।
दोस्तों “अपने विचारों को अपने तक ही सीमित मत रखिए, उसे लिखिए…रोज लिखिए!!! शुरुआत चंद पंक्तियों से भी चलेगी..

© ईशा दुसेजा वालेचा
दीप कोचिंग क्लासेस