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27 march विश्व रंगमंच दिवस (World theatre day)

दोस्तों, आज हम आपको एक ऐसी कला के दरबार से मिलाने की कोशिश करेंगे जो अत्यधिक रूप से आपकी निजी जिंदगीसे मिलता जुलता भी है और आपकी जिंदगी को आसान बनाने में बहोत कारीगर रहा है. अब आप जान ही चुके होंगे की हम विश्व रंगमंच दिवस के बारे में बात कर रहे है.

विश्व थिएटर या रंगमंच दिवस का अपना एक अलग ही महत्व है, क्योंकि यह लोगों की निजी जिंदगी से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा होता है. ग्रीक लोगों के समय से ही मनोरंजन के सबसे लोकप्रिय रूपों में थिएटर को बहुत ज्यादा महत्व रहा है.

Dance Performance
World theatre day theme 2020 
“Theatre and a Culture of Peace”

आज का अभिनय उद्योग भी उसी का उभरता हुआ कठिन लेकिन संभावित और समृद्ध रूप है. यदि आप थिएटर में गए हैं या आपने कोई लाइव शो देखा है, तो आप जानते होंगे कि थिएटर का अनुभव कितना मजेदार होता है.

फिल्म उद्योग ने अपनी भूमिका लेने के कारण यह आपको थिएटर या फिर रंगमंच अपनी आखरी साँसे गिनता हुआ लग सकता है, लेकिन जो रंगमंच की कला से प्यार करते हैं, उनके लिए आपको विश्व रंगमंच दिवस के बारे में जरूर जानना चाहिए! 

इसी का आपको एक उदाहरण बताते है. आपको नटसम्राट थिएटर का नाना पाटेकर ने कहा डायलॉग तो याद ही होगा; “जो अपनी जगह डटकर खड़ा है, वो मैं ही हूँ. जूलियस सीज़र, मैं हूँ प्रतापराव, ऑथेल्लो, मैं सुधाकर, हैमलेट और मैं ही हूँ गणपत रामचंद्र बेलवलकर, उर्फ़ नटसम्राट !”

उसी में विक्रम गोखले सर ने कहे एक डायलॉग के तो लोग इस कदर दीवाने है की उसे कहते या सुनते ही वो खुद को नटसम्राट समझने लगते है! वह डायलॉग कुछ इस कदर है: “तूम एक अभिनेता के नाम पे तो भिखमंगे हो ही, साथही इंसान कहलाकर भी तुम बहोत नीच हो !” आइए अब हम इस दिवस की अधिक विस्तृत से जानकारी लेते है ताकि हम इसे मनाने के तरिके जान सके.

विश्व रंगमंच दिवस का इतिहास

इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट (ITI) द्वारा 1961 में विश्व थिएटर दिन मानना शुरू किया गया, ताकि दुनिया भर में हर साल 27 मार्च को थिएटर के महत्व का जश्न मनाया जा सके. यह दिन सरकारें, राजनेता और संस्थानों के लिए एक जागरण के रूप में कार्य करता है ताकि समाज को इसका मूल्य पता चल सके और आर्थिक विकास में भी इसका बहोत गहरा असर होता है.

इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट हर साल एक वार्षिक संदेश की मेजबानी भी करता है, जिसे किसी चुने हुए प्रसिद्ध थिएटर कलाकार द्वारा कहां जाता है, जो थिएटर की कला और उसके भविष्य पर अपने प्रतिबिंबों को सांझा करता है. उन संदेशों में से सबसे पहला संदेश जीन कोक्ट्यू ने 1962 में दिया था.

इस संदेश को 50 से अधिक भाषाओं में अनुवादित किया जाता है,  ताकि इसे हजारों दर्शकों के द्वारा पढ़ा जा सके और सैकड़ों अखबारों में छापा जा सके. आईटीआई इसे अपने संस्थानों के द्वारा दुनिया के सभी कोनों में प्रसारण किया जाता है. दुनिया भर में आईटीआई के 90 से अधिक केंद्र हैं, इसलिए यह संस्थान हर साल इस दिन को मनाने के लिए कॉलेजों, स्कूलों और थिएटर पेशेवरों को भी प्रोत्साहित करता है.

इस दिवस पर पेरिस के प्रसिद्ध थिएटर का उद्घाटन भी हुआ था. आईटीआई के अनुसार, इस दिन का लक्ष्य दुनिया में रंगमंच को बढ़ावा देना है, ताकि रंगमंच के अपने सभी रूपों के मूल्य के बारे में पूरी दुनिया में जागरूकता लाई जा सके. साथ ही इसका उद्देश्य स्थानीय थिएटर समुदायों को व्यापक पैमाने पर बढ़ावा देना और मदद को सांझा करना भी है. 

विश्व रंगमंच दिवस कैसे मनाया जाए

वैसे तो इस थिएटर दिवस के कई समारोह आईटीआई के दिए गए स्थानों पर ही होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप उनमें भाग नहीं ले सकते. आप इसमें शामिल होने के लिए अपने देश या क्षेत्र में आईटीआई केंद्र या सहकारी सदस्य के साथ संपर्क कर सकते हैं.

आप उनके चुने हुए स्पीकर के संदेश को पढ़ या सुन भी सकते हैं और #worldtheaterday का उपयोग करके इसे मीडिया पर फैला भी सकते हैं.यदि इस दिन आप अपने स्वयं से कुछ अच्छा कार्य करवाना चाहते हैं, तो अपने स्थानीय थिएटर पर जाएं और अपने निजी संगठनों को कुछ दान करने के तौर उनका समर्थन करें और साथ ही अपने दोस्तों के साथ संगीत कार्यक्रमों को देखने के लिए टिकट भी खरीदें.

ऐसा करके आप भी थिएटर कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं और अपने स्थानीय क्षेत्र में रहते हुए भी संगीत और अभिनय कला सीख सकते हैं. यह एक बहुत मजेदार प्रयोग हो सकता है और आप अपने दोस्तों को भी इस कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए और इसे रोजमर्रा  की जिंदगी में समूह गतिविधि बनाने के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित कर सकते हैं.

© संतोष साळवे
एस सॉफ्ट ग्रुप इंडिया