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१८ अप्रैल: विश्व विरासत दिवस (World Heritage Day)

दुनिया भर में सारे देशों की अपनी एक सांस्कृतिक विरासत, एक अपनी-अलग पहचान होती है जो उन्हें उनके पूर्वजों की तरफ से मिली होती है. इसमें कई तरह की प्रेक्षणीय स्थल, मंदिर, मस्जिद, चर्च या फिर प्रसिद्ध जगह शामिल है. हमारे भारत देश में भी इसी तरह के सांस्कृतिक विरासत के हमारे पूर्वजों के द्वारा प्राप्त बहुत से प्रेक्षणीय स्थल हैं. इनमें ताज महल, लाल किला, बीबी का मकबरा, खजुराहो, अजंता-एलोरा गुफाएं जैसी कई जगह शामिल हैं.

विश्व विरासत दिवस हमें दुनिया की इन सभी विश्व संस्कृतियों को मनाने के लिए प्रोत्साहित करता है और महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्मारकों और प्रेक्षणीय स्थलों के बारे में जागरूकता लाने में मदद करता हैं. साथ ही दुनिया की संस्कृतियों के संरक्षण के महत्व को उजागर करने में भी हमारी मदद करता है. आइए इसी ‘विश्व विरासत दिवस’ या ‘विश्व धरोहर दिवस’ के बारे में हम विस्तार से जानें.

विश्व विरासत दिवस का इतिहास

सन 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल फॉर मॉन्यूमेंट्स एंड साइट (ICOMOS) अर्थात अंतर्राष्ट्रीय स्मारक और स्थल परिषद के द्वारा विश्व विरासत दिवस स्थापित किया गया था. वर्ष 1964 में यह संगठन वेनिस चार्टर में निर्धारित सिद्धांतों पर स्थापित किया गया था, जो स्मारकों को और स्थलों के संरक्षण पुनर्स्थापना के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि के साथ मान्यता देता है. विश्व विरासत दिवस के तहत इन मूल्यवान प्रेक्षणीय और सांस्कृतिक धरोहर के स्थानों की रक्षा के लिए पहचान की आवश्यकताओं की पूर्तता करनेवाले संगठन की स्थापना की गई और इससे संबंधित सैकड़ों क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया. इनमें कई इंजीनियर, आर्किटेक्ट, सिविल इंजीनियर, भूवैज्ञानिक, आर्टिस्ट्स और पुरातत्ववेत्ता भी शामिल हैं. हर साल वे यह सुनिश्चित करने का प्रयत्न करते हैं कि दुनिया में देखे गए सांस्कृतिक एवं महत्वपूर्ण स्मारकों का भविष्य अगली पीढ़ी को देखने के लिए संरक्षित रहे.



विश्व विरासत दिवस की स्थापना के बाद दुनिया भर में इसमें 150 से अधिक देशों में लगभग 10,000 सदस्य शामिल हो चुके हैं. उनमें से 400 से अधिक सदस्य कई संस्थानों, राष्ट्रीय समितियों और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समितियों के सदस्य हैं, जो इन सभी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थलों एवं धरोहरों को बचाने और नए लोगों को मिलाकर उन्हें जोड़ने में मदद कर रही हैं.
वर्ष 2016 में यूके के गोरहाम गुफा परिसर में भारत के कंचनजंगा नेशनल पार्क और इस्लामी गणराज्य ईरान में फारसी कानत की सूची में देखा गया था की यह अपने सदस्यों और नेतृत्व के अथक प्रयासों पर ही निर्भर है कि हम उनके भविष्य को अगली पीढ़ी के लिए किस तरह संरक्षित कर सकते हैं ताकि वे इसे भविष्य में देख पाएंगे या नहीं.

विश्व विरासत दिवस कैसे मनाएं

विश्व विरासत दिवस मनाने का सबसे आसान और कारगर तरीका यही है कि आप अपने आसपास के सांस्कृतिक और महत्वपूर्ण स्थानों की खोज करें तथा उन्हें भेट दे. ऐसा करने से पहले आप अपनी खोजी जाने वाली साइट का अवलोकन करें और वहां पर जाने के लिए आपकी सुरक्षा की मुकम्मल इंतजाम कर ले. उन सब विरासतओं का सम्मान करें.
सुनिश्चित करें कि इन भेट दी हुई साइट को उसका सच्चा महत्व प्राप्त हो और वे पूरी तरह से संरक्षित की गई हो. साथ ही ध्यान दें कि किसी महत्वपूर्ण साइट को सांस्कृतिक धरोहर एवं महत्वपूर्ण विरासत से गायब न होने दे.
आशा है कि विश्व विरासत दिवस पर आप अपने प्रयत्नों से लोगों में इन महत्वपूर्ण साइटों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन विरासतों को संरक्षित करने का प्रयत्न जरूर करेंगे.

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