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women empowerment kyo jaruri hai | महिला सशक्तिकरण के फायदे

women empowerment : दोस्तों, हम एक ऐसे आधुनिक युग में जी रहे हैं, जहां हमें पुरानी पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली नई पीढ़ी को भी संभालना है और उन्हें हमेशा समानता का एहसास कराना है. हमने खुद भी पहली से दसवीं कक्षा तक स्कूल में यही तो शिक्षा ली है, है ना? आज भी लाखों छात्र अपनी स्कूल में यही शिक्षा ले रहे हैं. फिर भी हम इसी दुविधा में फंसे हैं कि पुरुष और महिलाएं अलग-अलग क्यों है? महिलाओं को पुरूषों के समान क्यों नहीं देखा जाता?

क्यों महिला होने के नाते उसे बार बार ये एहसास कराया जाता है कि वह कोई काम करने में समर्थ नहीं है? ऐसे हजारों सवाल आजाद भारत में आज भी हमारे मन में आते हैं. देखा जाये तो ये मानवता के नाम पर हमारी तौहीन ही है. यह स्थिति हमें जल्द ही नष्ट करनी होगी.

what is women empowerment and it’s types  |  महिला सशक्तीकरण क्या है और इसके प्रकार 

empowerment अर्थात किसी भी चीज की अधिकारिता. उस बात को लेकर अपनी आवश्यकताओं, विचारों, अपनी राय, अपने विश्वास एवं भावनाओं को लेकर किसी व्यक्ति की कुछ करने की क्षमता को हम एम्पोवेर्मेंट कह सकते हैं. और जब यह बात महिलाओं के बारे में हो तो उसे एक मजबूत आधार मानकर women empowerment के बारे में सोचना चाहिए. देखा जाए तो आज समाज को कई प्रकार से महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता है. जैसे की

1. Economical empowerment | आर्थिक सशक्तिकरण : इस प्रकार में महिलाओं को सशक्त बनाने के बारे में ये बात शामिल होती है कि लोग किस तरह धन कमाने के लिए काम करते हैं.


2. Political empowerment | राजनीतिक अधिकारिता : इस तरीके से हम ये बात सीखते हैं कि हमारे आस पास मौजूद सभी चीजों एवं अधिकारों का हमें खुद के विकास और सही निर्णय लेने के लिए किस प्रकार उपयोग करना चाहिए होता हैं.


3. cultural empowerment | सांस्कृतिक सशक्तिकरण : ये सशक्तिकरण महिलाओं को उनकी हर रोज की चीजें जैसे कपडे, भाषा, भोजन, आध्यात्मिक विश्वास और विचार इन तरह की बातों में किस तरह से उच्च दर्जा प्राप्त करना चाहिए, इसके बारे में सोचना होता है.


4. Societal empowerment | सामाजिक अधिकारिता : इस तरह की अधिकारिता से महिलाओं को उन सभी बातों से परिचित कराना जरूरी होता है, जहां वे रहती हैं, काम करती हैं, और लोगों के साथ अपने विचार बाटती है.


5. National empowerment | राष्ट्रीय सशक्तिकरण : इस मामले में किसी राष्ट्र की ताकत का पता चलता है, जिसके पास खुद के निर्णय लेने की शक्ति होती है. और वो ऐसा उनके महिलाओं के सशक्तिकरण के दम पर कर सकते हैं.

What is the importance of women’s empowerment in India? | भारत में महिला सशक्तिकरण का क्या महत्व है?


यदि हम ठीक तरीके से सोचें, तो हमें ये बात उभर कर आएगी कि महिला और पुरुष के बीच कोई अंतर ही नहीं है. ये बस हमारे मन का वहम है की महिलाएं और पुरूष की बराबरी नहीं हो सकती. लेकिन महिलाओं का काम अपनी रसोई और बच्चे संभालना इतना ही होता है, यही बात हमेशा से हमारे विचारों में बिठाई जाती है. हमारे दिमाग में हमेशा ही पुरुषों और महिलाओं के लिए किसी भी प्रकार की चीजों को अलग-अलग तरीके से सोचना चाहिए, यही बात बताई जाती है.

शायद इसीलिए ये बात बचपन से हमारे दिल में उतर जाती है. यह बात जानने के लिए हमें आजादी के बाद भी 70 साल से ज्यादा लग गए हैं. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात यही है कि हमारा देश अभी भी इस बात से संतुष्ट नहीं है. ऐसा नहीं है कि महिलाओं को कोई काम नहीं आता या फिर उन्हें कहीं काम नहीं मिलता. उल्टा पुरुषों की तुलना में महिलाएं ही अधिक काम कर सकती है. इसके कई प्रमाण भी है. लेकिन उन्हें स्वीकार करने कि हममें ताकत होनी चाहिए. तभी हम इस बात की सच्चाई जान सकते हैं.


necessary steps for women’s empowerment in india | भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए आवश्यक कदम

राजनीति हमारे देश की जीवनदायिनी है और इस क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका फिलहाल नगण्य है. हम सभी को इस विषय पर जरूर विचार करना चाहिए. समय के साथ-साथ अब यह स्पष्ट हो चुका है कि पितृसत्तात्मक संस्कृति खतरनाक होती जा रही है. हमें इससे जल्द से जल्द बाहर निकलना चाहिए. किसी भी क्षेत्र के, किसी भी युग की माता को उसका पढा-लिखा होना ही उसके अच्छे भविष्य की स्थिति उत्पन्न करेगा.

तभी वह अपने बुलंद जीवन को और उसके नीति को सार्थक बना सकती है. तभी हमारे देश के भविष्य को निखारा जा सकता है. चाहे वह क्षेत्र कोई भी हो. जैसे कि विज्ञान, बैंकिंग, शेयर बाजार, आधुनिक तकनीक, शिक्षा, चिकित्सा सेवाएं, राजनीति आज ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है, जहां महिलाओं ने अपनी प्रगति ना की हो. चाहे जो भी सेवा रहें महिलाएं अपने क्षेत्र में हमेशा ही आगे बढ़ती रही है.

अपना घर कैसे चलाना है इस तरीके के महत्वपूर्ण सबक सिर्फ एक महिला ही दे सकती है. और इसी वजह से भारत में आज कई महत्वपूर्ण गांवों में ग्राम पंचायत का पूरा कार्यभार सिर्फ महिलाएं संभालती है. इसी तरह वे से कृषि क्षेत्र में भी उत्कृष्ट सेवा दे रही हैं. हमें उन सभी महिलाओं पर बहुत गर्व है.

लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद भी महिलाओं की आर्थिक स्थिति, उनका आर्थिक पक्ष कमजोर लगता है. और उन्हें बार-बार पुरुषों की कहासुनी सुननी पड़ती है. इसी वजह से महिलाओं का सशक्त होना बहुत जरूरी है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि women empowerment से उसका घर और उसका परिवार भी सशक्त बन सकता है.

और हम ये बात जानते हैं कि इसी में अपने समाज और देश की प्रगति निहित है. महिलाओं के जीवन को बर्बाद करने के बजाय इसलिए बचाया जाना चाहिए ताकि सभी महिलाओं को एक नया रास्ता मिल सके. उनकी जीवन में आशा का किरण उनके लिए आत्मविश्वास लेकर आएं.


women empowerment in india | भारत में महिला सशक्तिकरण


भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिराजी गांधी, पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभाजी पाटिल, हमारी दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला, सोनियाजी गांधी, सुषमा स्वराज, सुनीता विलियम, मिताली राज ये उन सभी महिलाओं के नाम है, जिन्हें हमें गर्व के साथ सबसे पहले लेना चाहिए. लोगों के महान विरोध के बावजूद भी, इन सभी महिलाओं की बदौलत हम दुनिया को यह बात बताना चाहते हैं कि अपना नाम कमाने में इन महिलाओं ने कोई भी कसर नहीं छोड़ी.

वैसे तो आजादी के पहले भी और बाद में भी महिलाओं के राष्ट्र निर्माण की भागीदारी को इनकार नहीं किया जा सकता. और हम यह भी भूल नहीं सकते की कितने पुरुषों ने राष्ट्रीय क्रांति में अपनी जान न्योछावर कर दि है. लेकिन आज महिलाओं की सच्ची स्थिति क्या है, ये जानने के लिए हमें जरा भी देर नहीं लगती. ताकी महिलाओं के बारे में सोचने का लड़कियों का नजरिया बदल गया तो, उनका दृष्टिकोण सच्चा हो जाएं. तभी हम भारत को आधुनिकता की ओर ले जा सकते हैं.

चाहे महिलाओं का क्षेत्र कोई भी हो, उनका कौशल्य कोई भी हो, लेकिन अगर उनके पास खुद अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए कोई मंच है, तो वो अपने क्षेत्र में अपना नाम जरूर आगे ले जा सकती हैं. अगर महिलाओं को, लड़कियों को आपने इज्जत नहीं दी तो आपके भविष्य को भी तवज्जो नहीं दे पाएंगे. महिलाओं को एक बार उठके खड़े होने दीजिए. उन्हीं के लिए आवाज उठाने दीजिए. तभी हम सच्चा  women empowerment day लागू करा सकते हैं.

किसी भी शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की हमें सख्त जरुरत हैं. आखिर उनके अधिकार क्या है. उन्हें इन अधिकारों का उपयोग किस प्रकार से करना चाहिए, ये बात अगर उन्हें बता दे, तो शायद चित्र कोई और हो सकता है. शिक्षा में भी उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए आपको उन्हें किसी भी परिस्थिति में स्वीकार करना चाहिए. और समय रहते हमें इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि हमारे गांव, हमारे राज्य और देश का लिंगानुपात एक समान रहे.

महिलाओं का सशक्तिकरण की बात कोई मुट्ठी भर लोगों के काम नहीं है. बल्कि ये पूरी समाज को ही सशक्त बनाने की बात है. इसीलिए पूरे समाज को भी उतना ही सावधान और शिक्षित होने की जरूरत है. जबकि महिलाएं मुख्य रूप से सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ ही काम कर रही है. अगर इसी तरह का भेदभाव चलता रहा, तो उनके लिए इस अन्याय को सामने लाने का भी कोई मार्ग होना चाहिए. किसी भी हालत में हमें अपने मन को शांत नहीं रखना चाहिए.

अपने अन्याय को सहते हुए चुप नहीं बैठना चाहिए. क्योंकि सावित्रीबाई फुले, महात्मा ज्योतिबा फुले, डॉक्टर आंबेडकर, रानी लक्ष्मीबाई ऐसे ही शांत रहती थे, तो आज महिलाओं की स्थिति शायद कुछ अलग होती थी. अगर ये लोग भी दूसरों की तरह चुप्पी साधे बैठ जाते, तो हमारा समाज आज भी पीछे ही रहता.


writer’s blog | लेखक की मानसिकता

वास्तव में हमें देश चलाने के लिए दोनों व्यक्तियों की आवश्यकता होती है. एक होता है सत्ताधारी और अर्थात दूसरा होता है जिम्मेदार प्रतिद्वंदी. इसी तरह घर चलाने की लिए भी दोनों लोगों की आवश्यकता होती है. जैसे कि पुरुष और स्त्री. इनमें से कोई एक हिस्सा भी बाधित हो जाए तो उस घर का या फिर उस देश का नुकसान ही होता है.

इसलिए हम आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि इस गंभीरता को जल्द से जल्द पहचाने और अपने घर में और साथ ही देश में भी समानता भरे विचार को लागू करें. इसीलिए समय की मांग यही है की महिला सशक्तिकरण को पहचानकर इसका पालन करें. साथ ही सरकार को भी इसमें सहयोग दे.

हमें आज इस विषय पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि महिला सशक्तिकरण समय की मांग है और उसे नकारने के बजाय इसका हमें दिल से स्वीकार करना होगा. ताकि हम सभी महिला सशक्तिकरण की दिशा में अच्छा कदम उठा सके. इसी के साथ आप भी अपने घर और समाज के साथ-साथ देश का भी नाम और ऊंचा कर सकेंगे.

हमारा women empowerment kyo jaruri hai | महिला सशक्तिकरण के फायदे पर लिखा हुआ लेख पढ़कर अगर आपके भी मन में अपने परिवार की सभी स्त्रियों के प्रति सशक्त भावना उत्पन्न हुई हो, तो नीचे दिए गए comment box में comment करके हमें जरूर बताएं!


– योगेश बेलोकार
Ssoft Group INDIA


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2 Comments

  1. Amit Amit

    जी हाँ, महिलाओं का सक्षमीकरण होना ही समय की मांग है.
    इसी के लिए महात्मा जी फुले, डॉ. अम्बेडकर जी जैसे हमारे देश के सपूतों ने बहोत कार्य किया है 👍💐

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