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९ मई: ट्रेन दिवस (Train Day) रेल गाडी दिनविशेष

वे दुनिया भर में ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक हजारों मील की दूरी पार करते हैं. माल और यात्रियों को दूर-दराज स्थानों तक पहुंचाते हैं और वापस भी ले आते हैं.जी हां, हम बात कर रहे हैं ट्रेन नामक एक बहुत खूबसूरत और बड़ी मशीन के बारेमें जो हर रोज हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

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शहरों और जंगलों, पहाड़ों और मैदानों इन सभी इलाकों से होकर गुजरने वाली दो चमकदार लाइन पर अपना रास्ता तय करने वाली यह मशीन जिन्हें जरूरत है उन सभी लोगों को या फिर उनके सामान को गंतव्य स्थान पर ले जाने के लिए हमेशा तैयार रहती है. यह मशीन दुनिया भर में सभी अर्थव्यवस्था और उद्योगों के लिए अद्भुत और बड़ी चीज होती है.


ट्रेन दिवस का इतिहास

ट्रेन दिवस का इतिहास सभी ट्रेनों से जुड़ा हुआ है. रेल मार्ग वास्तव में घोड़ों द्वारा संचालित वैगन का एक अगला उदाहरण है और इसे लगभग 2000 वर्षों का इतिहास रहा है.इसका पहला उदाहरण लगभग 600 ईसा पूर्व में प्राचीन ग्रीस में कोरींथ के पास एक ट्रेन ट्रैक से मिला है. इस उदाहरण में पुरुष और जानवर मिलकर समुद्र में 5 मील तक चूना पत्थर के साथ नावों को अपने गंतव्य स्थान तक खींचते थे. मिस्र में रोमन भी ऐसा ही करते थे.

शुरुआती दिनों में धातु की पटरियां नहीं बनाई जाती थी. उसके बजाय लकड़ी की पटरियां और साथ में पत्थर के स्टोन ट्रैक थे.भारत में ट्रेन की शुरुआत अंग्रेजों ने की. सबसे पहली ट्रेन बोरीबंदर(मुंबई) से थाने की दरमियान 1853 में चली.इसके बाद आई औद्योगिक क्रांति ने यह सब बदल दिया और धातु की रेल प्रमुख हो गई. 1750 के आसपास उद्योगों में सबसे ज्यादा लोहे का उत्पाद उत्पादन शुरू किया गया. धातु विज्ञान और इंजीनियरिंग के आधुनिक विज्ञान द्वारा संभव नई तकनीकों ने जैसे कोई उत्पादन विस्फोट जैसी परिस्थिति का निर्माण किया.

आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ पटरियों की कीमत गिरने लगी. जहां सबसे अधिक बिछाने के लिए संभव हो सकता था सदस्य लकड़ी की पथरिया अक्सर टूट जाती थी.इसके बाद भी बहुत सी समस्याएं थी. जैसे कि जॉन क्यूर नामक एक औद्योगिक प्रवर्तक ने देखा कि सपाट पहियों की वजह से वैगन को एक लाइन पर चलने के लिए दिक्कतें आ रही थी. इसलिए उन्होंने अपने विचार से पहिए को अंदर की तरफ एक एल आकार का प्रोफाइल बनाया जो कि ट्रैक से वैगन को फिसलने से रोक देता था.

2008 में एम ट्रैक नामक कंपनी ने लोकोमोटिव के इतिहास को बनाने में मदद करने के लिए ट्रेन दिवस की स्थापना की. इसके पीछे यह विचार था कि आधुनिक दुनिया के विकास में ट्रेनों और उसकी इतिहास के विषय पर आम जनता को अधिक संरचना एवं जागरूक किया जाए. रेल नेटवर्क के निर्माण में हमारे पूर्वजों के अथक प्रयासों को याद करने के लिए के लिए ट्रेन दिवस एक उत्कृष्ट अवसर है.

ट्रेन दिवस कैसे मनाएं

ट्रेन दिवस मनाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप घूमने के लिए ट्रेन से ही जाएं और उसकी सवारी करें. इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां जा रहे हैं, क्योंकि ट्रेन की सवारी करना हर बार एक शानदार और आरामदायक हमको हो सकता है.कुछ शहरों में अभी भी स्टीम ट्रेनें चलती है जो उनके इतिहास का हिस्सा है. आप उनका भी अनुभव ले सकते हैं. यदि आप कार या फिर प्लेन के बजाय यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो शायद ट्रेन से अच्छा और अद्भुत अनुभव देने वाला दूसरा कोई शानदार मौका आपके पास नहीं होगा, है ना?

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