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स्वदेशी का स्वीकार : समय की मांग – Swadesi ka swikar

स्वदेशी का स्वीकार : स्वदेशी चीजों का स्वीकार एवं उपयोग करना आज एक बेहद जरुरी हो गया है. आज के इस युग में स्वदेशी को अपनाना होगा. क्यों की अमरिका,चायना, रुस जैसे बलशाली देश अपनी आयात निर्यात पॉलीसी के चलते आगे सहयोग नहीं करेंगे ऐसा अनुमान लगाया जाता है.

स्वाभाविक है की चायना भी दुनिया को परेशानी में डाल रहा है एवं पाकिस्तान भी आतंकवाद से पुरी दुनिया को परेशानी में डाल रहा है. ऐसी बाहरी चीजें एवं देश में विगत कुछ सालों से बढ़ती बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है.

कोरोना जैसे खतरनाक महामारी का सामना करना आसान बात नहीं है. लोगों की नोकरीयां जा रही है। कुछ लोगों की नोकरीयां जाने की कगार पर है. इसलिए ऐसी परिस्थिती पर अगर हावी होना होगा तो स्वदेशी का हमें स्वीकार करना होगा यही समय की मांग है.

स्वदेशी का अर्थ:-

स्वदेशी का अर्थ क्या है? किन किन चीजों को हम स्वदेशी करेंगे? कोई भी चीज जो हमारे देश में किसी भी भारतीय व्यक्ती ने तैयार की हो उस चीज को हम स्वदेशी कह सकते है. उदाहरण के तौर पर हिरो सायकल, हिरो मोटरबाईक,बजाज मोटरबाईक, उषा कंपनी के पंखे इ. चीजे स्वदेशी बनावटी के है.

स्वदेशी का आसान अर्थ यही है की सभी विदेशी बनावटी के चीजों का बहिष्कार कर स्वदेशी चीजों को अपनाना.


स्वदेशी का स्वीकार क्यों करना चाहिए:-

समय की यही मांग है की स्वदेशी को अपनाना होगा. क्यों की इसीपर देश का विकास होना तयार होगा. देश मजबूत स्थिती से आगे बढ़ेगा और देश का विकास होगा. स्वदेशी का स्वीकार इसलिए करना होगा ताकी युवाओं को रोजगार मिले. युवाओं की बेरोजगारी की समस्या खत्म हो और हर हाथ को रोजगार मिले. बेरोजगारी एक पिड़ा है और किसी को इस समस्या से लेना देना नहीं है. चाहे वो सांसद हो प्रधानमंत्री हो या कोई और किसी को इस बात की चिंता है ही नहीं की किसी को रोजगार हो या ना हो. इसीलिए स्वदेशी वस्तुओंपर उसकी निर्मिती पर हमें बेहद सावधानी से ध्यान देना होगा.

स्वदेशी :  इतिहास में हुआ स्वदेशी आंदोलन 

अंग्रेजों के शासन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए या कहिए की अंग्रेजों ने जो चीजें खुद तैयार की है उनपर बहिष्कार करने के लिए स्वदेशी आंदोलन इतिहास में हुए है. जो सुवर्ण अक्षरों की छाप इतिहास के पन्नोंपर दर्शाते है. ७ अगस्त १९०५ को बंगाल के कोलकाता में ऐसा ही स्वदेशी आंदोलन हुआ था.

बंगाल के विभाजन के चलते यह आंदोलन हुआ था इस आंदोलन का परिणाम यह हुआ की यह आंदोलन पुरे देश में फैल गया.
लाला लजपतराय,लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, गोपालकृष्ण गोखले, बाबू गेनू इ. ऐसे महत्वपूर्ण व्यक्ती के नेतृत्व में यह आंदोलन किये गए है. और ऐसे आंदोलन के दूरगामी परिणाम भी मिलें है. भारतीय उद्योग को प्रोत्साहन इसी आंदोलन के तहत मिला है.

स्वदेशी  :  make in india :- 

  • भारतीय उद्योग एवं उद्योजक को प्रोत्साहन मिलें.
  • व्यापार एवं व्यवहार में बढोतरी हो इसलिए स्वदेशी के निर्माण पर हमें ध्यान देना होगा.
  • ताकी हर इसांन के कौशल्य को एक रंगमंच मिले.
  • उसका व्यवहार भी हो और रोजगार भी हो.
  • इसलिए आज प्रधानमंत्री make in India की घोषणा करते हुए दिखाई देते है.
  • व्यापार कोई भी हो, निर्माण कोई भी हो लेकीन वह स्वदेशी होना चाहिए.
  • जिसे हर किसी को अपनाना होगा ताकी युवाओं को रोजगार मिलें.

स्वदेशी चीजों का महत्व :-

हर चीज का महत्व अपनी अपनी जगह दिखाई देता है. कोई भी चीज लो, घड़ी जो सही समय बताती है. कपडे जो हम बदन को ढकने के लिए पहनते है. वैसे ही स्वदेशी चीजों का महत्व है.

१) स्वदेशी चीज देश में निर्माण होगी तो आवश्यक पैसा देश में रहेगा.
२) युवाओं को रोजगार मिलेगा.
३) लोगों की आमदनी बढ़ेगा.
४) विदेशी चीजों से स्वदेशी चीज स्वस्त एवं अच्छी मात्रा में मिलेगी.
५) कौशल्य का विकास होगा जिस की हर एक देश को आवश्यकता है.

निजी जीवन में लोग स्वदेशी वस्तू को अपनाने लगेंगे. कोई भी व्यक्ती विदेशी वस्तू से दूर रहेगा. हर किसी के मन में अभिमान होगा की यह वस्तू मेरे देश में तैयार की है जिसका मैं खुद एक देश के नागरिक के नाते उपयोग कर रहा हूँ.
देश की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री ने अभितक २२४ मोबाईल एप पर डीजीटल स्ट्राईक किया है.

जिस में पब्जी, टिकटॉक,हेलो, व्हीचॅट इ. एप शामिल है. किसी भी देश के आगे सुरक्षा एक महत्वपूर्ण पैलू होता है. इसी के चलते ऐसे फैसले लेने होते है ताकी देश सुरक्षित एवं मजबूती से अपना स्थान बनाए रखें. Gross development product को बढा़वा मिले. जिस में हर साल वृध्दी हो इसलिए स्वदेशी चीजों का अपने स्थान पर महत्त्व होता है.

लेखक का मनोगत:-

स्वदेशी का मुद्दा एक अहं मुद्दा स्वतंत्रता के बाद भी दिखाई देता है. देश की सुरक्षा के लिए एवं युवाओं को रोजगार के लिए स्वदेशी को एकबार फिर अपनाना होगा. ताकी सकल राष्ट्रीय उत्पादन बढ़ सकें. देश में एकता की भावना विकसित हो और हम सब एक है यह विचार अमर रहें. इसलिए स्वदेशी चीजों से दूर ना हटे बल्कि स्वदेशी को अपनाओं क्यों की इसके परिणाम जो मिलते वो बेहद महत्वपुर्ण होते है. जिसका लाभ हम सभी को आनेवाले दिनों में मिल सकता है. पुरी दुनिया की भारत की और देखने की दृष्टी हम स्वदेशी को अपनाकर बदल सकते है. धन्यवाद

योगेश बेलोकार
Ssoft Group INDIA


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