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Subconscious mind : आपके दिमाग का ‘पावर हाउस’

दोस्तों, आज हम अपने दिमाग का पावर हाउस अर्थात Subconscious mind के बारे में बात करेंगे. हमारा दिमाग दो हिस्सों में बटा होता है. पहला है कॉन्शियस माइंड यानी ‘सचेत मन’ और दूसरा है सबकॉन्शियस माइंड यानी ‘अवचेतन मन’.

आप रोजमर्रा के जो भी काम कर रहे हो, वो सब कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड ही कंट्रोल करता है. इसका मतलब यह है कि ये दोनों माइंड मिलकर ही हमारी जिंदगी चलाते है.इन दोनों में से सबकॉन्शियस माइंड ज्यादा खास होता है. आपकी जिंदगी के 90% निर्णय Subconscious mind ही लेता है. दरअसल आपके दिमाग की असली शक्ति आपके सबकॉन्शियस माइंड में ही होती है.

आपका ह्रदय 1 मिनट में तक़रीबन 70 बार धड़कता है, लेकिन इसे कौन कंट्रोल करता है? हर बार 1 मिनट में लगभग इतने ही हार्टबीट करानी है, इस पर ध्यान कौन रखता है? आपकी ब्लड वेसल में दौड़ने वाले खून का दबाव हो या आपके शरीर के तापमान पर नियंत्रण रखने की बात हो इन सभी को कौन मेंटेन करता है? इन सभी सवालों का एक ही जवाब है सबकॉन्शियस माइंड! आसान शब्दों में इसे दिमाग का ‘पावर हाउस’ कह सकते हैं. यही डिसाइड करता है कि आप कौन हो और कैसे बर्ताव करते हो.

Subconscious mind Vs Conscious mind

सबकॉन्शियस माइंड की कैपेसिटी वर्चुअली अनलिमिटेड होती है. ‘आदत’ इस शब्द का सीधा संबंध आपके सबकॉन्शियस माइंड से होता है. उदाहरण के तौर पर देखें तो सोने से पहले रात में आपको इंटरनेट का उपयोग करने की आदत लग गई है. आपको मोबाइल हाथ में लेकर इंटरनेट चलाना है यह बात आपका सबकॉन्शियस माइंड ही बताता है. कोई भी आदत सबकॉन्शियस माइंड में ही स्टोर रहती है. हम सभी जानते हैं कि आदत को आसानी से नहीं बदला जा सकता; लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते कि इसका कारण क्या है.

Sagar’s quotes


“The lure & blind faith has the power to pause your subconscious mind temporarily.”— Sagar Wazarkar

हमारी जिंदगी में बहुत सी चीजें ऐसी होती है जो हम जानते हैं कि हमें उन्हें नहीं करना चाहिए; लेकिन फिर भी हम उन्हें करने से खुद को रोक नहीं पाते. यह खासियत सबकॉन्शियस माइंड की होती है. लेकिन इसी बात को हम सकारात्मक तरीके से भी ले सकते हैं.जब भी आप कोई बात कॉन्शियस माइंड के बजाय सबकॉन्शियस माइंड में पक्की बिठाते हो, तो सबकॉन्शियस माइंड उस बात की सच या झूठ यह पुष्टि नहीं करता.अगर आप कोई बात सबकॉन्शियस माइंड में पक्की बिठा लें तो उसे सच होने से कोई नहीं रोक सकता. आप अपने भीतर और बाहरी दुनिया में भी ऐसी परिस्थिति का अनुभव करेंगे जो चमत्कार से कम नहीं होगी.

इसके अंदर जो भी बात चली गई वह उसे सच करने में अपनी पूरी ताकत जुटा देता है.इसी कारण अगर आप अपने सबकॉन्शियस माइंड से संपर्क बनाने के तरीके को सीख लें, तो आप अपनी जिंदगी में बहुत बड़ी ऊंचाई हासिल कर सकते हैं और जो चाहे वह पा सकते हैं.

Subconscious mind से बातचीत करने का तरीका

सबकॉन्शियस माइंड में कोई भी बात पक्की बिठाने के अलग अलग तरीके होते हैं. इन्हीं में से एक है एफर्मेशन तकनीक!एफर्मेशन आपके सबकॉन्शियस माइंड से बातचीत करने की सबसे कारीगर तकनीक है. जब भी कोई बात हम सुनते हैं, तो वह सबसे पहले हमारे कॉन्शियस माइंड के पास जाती है. तब कॉन्शियस माइंड तय करता है कि, उसे सबकॉन्शियस माइंड के पास भेजना है या नहीं.

अगर वह विशेष बात उसे सही लगती हो तो वह सबकॉन्शियस माइंड को तुरंत भेज देता है. उदाहरण के तौर पर देखिए, अगर आपको रोड पर चलता हुआ कोई पागल आदमी कह दे कि आप जिंदगी में कुछ भी अच्छा नहीं कर पाएंगे तो आप उसकी बात पर ध्यान नहीं देते; क्योंकि आप जानते हैं वह पागल है. लेकिन वही बात अगर आपके किसी अच्छे टीचर ने कहीं तो आपका कॉन्शियस माइंड उसे गंभीरता से लेता है.

इस विचार के चलते आपके कॉन्शियस माइंड को लगता है कि यह बात महत्वपूर्ण हैं और वह इस बात को सबकॉन्शियस माइंड में भेज देता है. उस समय कॉन्शियस माइंड यह विचार नहीं देखता कि वह बात सकारात्मक है या नकारात्मक है. वह उसे सिर्फ भेजने का काम करता है.इसलिए जो लोग नकारात्मक बातें सुनते हैं और नकारात्मक वातावरण में रहते हैं वे लोग आगे नहीं बढ़ पाते. यही नियम सकारात्मक बातों पर भी लागू होता है. अगर कोई बड़ा इंसान आपके काम की तारीफ करें और आपको बढ़ावा दे, तो आपको बहुत अच्छा लगता है. सही कहां ना?

हम में से ज्यादातर लोग जो सकारात्मक बातें सुनते हैं और सकारात्मक किताबे या लेख पढ़ते हैं, वे जिंदगी में कुछ ना कुछ अच्छा कर ही लेते हैं. क्योंकि उन सकारात्मक बातों से उनके सबकॉन्शियस माइंड को अच्छी ताकत मिलती है और वे जिंदगी में जो चाहे पा सकते हैं.

सबकॉन्शियस माइंड की ताकत पहचानें

आपने बहुत सारे लोगों को कहते हुए सुना होगा कि गणित बहुत कठिन विषय होता है. अगर यही बात आप बार-बार सुनेंगे या फिर बार-बार कहेंगे तो वह आपके सब कॉन्शियस माइंड में पक्की बैठ जाती है और आसान सवाल भी आपको कठिन लगने लगते हैं.

लेकिन इसके विपरीत अगर आप यह सोचने लगे कि गणित बहुत आसान है, तो आज या कल यह बात आपके सबकॉन्शियस माइंड में पक्की हो जाती है. संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि, अगर कोई बात हमारे कॉन्शियस माइंड को लगातार सुनाई जाए या बार-बार कहीं जाए तो वह बात सबकॉन्शियस माइंड में जाने की संभावनाएं बहुत ज्यादा होती हैं.

इसलिए सभी कहते हैं कि हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए.आपने अंग्रेजी में यह कहावत सुनी ही होगी, Be Positive, Be Successful… इसलिए आप अपने मन से सकारात्मक बातें बार-बार कहने की आदत डाल लें और साथ ही सफल लोगों की किताबें या फिर लेख पढ़े.

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© संतोष साळवे
एस सॉफ्ट ग्रुप इंडिया

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