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न्यूरो लिंगविस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP) – कलाकारी जो बदल सके जिंदगी

क्या आप जानते है, की आजके दुनिया मे न्यूरो लिंगविस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP) एक ऐसी तकनीक है जिससे आप अपने जिंदगी को पूरी तरीके से बदल सकते है. चाहे वो आपका स्वास्थ हो, आपकी सफलता हो, आपका रिश्ता हो, आपका सामाजिक स्थान हो या आपका आध्यात्मिक जीवन हो…. इन सारे बातों मे एक ऐसी तकनीक है जो आपको सशक्त कर सकती है, आपकी मदत कर सकती है अपने जीवन मे पूरी तरह से अच्छे बदलाव लाने मे..

इस तकनीक का इस्तेमाल आजकल ज्यादातर ट्रैनिंग इंडस्ट्री मे किया जाता है. चलिए थोड़ा विस्तार से देखते है इस तकनीक के बारे मे.

इन प्रमुख तीन चीजों से बनती है न्यूरो लिंगविस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP)

  1. न्यूरो (Neuro)
  2. भाषा सम्बन्धी विज्ञान (Linguistic)
  3. प्रोग्रामिंग (Programming)

१) न्यूरो (Neuro): न्यूरो का मतलब होता है दिमाग से जुड़ी चीज. दिमाग में जो भी चल रहा होता है उसको प्रत्येक व्यक्ति अपने इंद्रियों की मदत से बाहरी दुनिया से अलग-अलग जानकारी प्राप्त करता है. और फिर अपने दिमाग में अपने समझ के अनुसार उसे छानकर प्रस्तापित कर लेता है. आपका मानसिक नक्शा, आपके आंतरिक विचार, ध्वनि, स्पर्श, जागरूकता, आंतरिक उत्तेजना, स्वाद, स्वभाव और गंध इत्यादि कई प्रकार की प्रक्रियाओ को न्यूरो के भाग मे समझाया जा सकता है.

२) भाषा सम्बन्धी विज्ञान (Linguistic): लिंगविस्टिक मतलब भाषा से जुड़ी चीज. हम सब अपनी आन्तरिक और बाहरी भाषा का उपयोग दुनिया से संवाद करने के लिए करते है. आसान भाषा मे कहें तो हम अपनी जानकारी के अनुसार कैसे व्यवहार करते है, कैसे हम अपनी आंतरिक छवियों, ध्वनियों और भावनाओं को भाषा मे बदलकर हमारा दूसरा मानचित्र बनाते हैं, जो दुनिया से हमें जोड़ता है. इसमे आपकी शारीरिक भाषा भी शामिल होती है

३) प्रोग्रामिंग (Programming): प्रोग्रामिंग मस्तिष्क कैसे काम करता है इससे जुड़ी है. कैसे दिमाग जानकारियों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देता है. जिस चीज के साथ जैसा व्यवहार किया जाए वह वैसे अपनी प्रतिक्रिया देती है, और यही प्रोग्रामिंग होती है, जो हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है. यह न्यूरोलॉजिकल छानबीन प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप होती है.

न्यूरो लिंगविस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP) आपको क्या देती है?

NLP के जरिए आप अपने मन को प्रोग्राम कर सकते है. सारी दुनिया को हम अपने मन से समझते है, लेकिन ये मन कैसे काम करता है? क्या कभी हमे ये समझाया गया है? क्या हमने कभी इसे जानने की कोशिश की है?

ये कितना अजीब है, की जिस चीज से आप, जिंदगी की सारी चीजे कर रहे है, जिसके जरिए आप अपने जीवन मे आगे बढ़ रहे है, हम उस चीज को समझने की कोशिश ही नहीं करते. और इसके कारण ही जीवन मे कामयाबी को हासिल करना, कुछ बड़े बदलाव लाना बहोत ज्यादा मुश्किल हो जाता है. लेकिन इस तकनीक को समझकर आप अपने जिंदगी मे बहोत सारे बदलाव ला सकते है.

NLP की शुरुवात कैसे हुई?

१९७० के दशक की बात है, दो ऐसे महान लोग थे जिन्हे उनके कार्यक्षेत्र मे महान व्यक्तियों मे पहचाना जाता है. एक का नाम है Richard Bandler और दूसरे का नाम है John Grinder.

Richard यह क्यालिफोर्निया यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट थे, और John उनके लिंगविस्टिक विषय के असिस्टन्ट प्रोफेसर थे. इन दोनों ने उस समय सोचा की अगर कोई इंसान बहोत बड़ी कामयाबी या बदलाव लाता है, तो जरूर वह इंसान कोई ना कोई रणनीति अपना रहा है, या अपने दिमाग को कुछ अलग तरीके से इस्तेमाल कर रहा है, जैसे बाकी लोग नहीं कर पाते है.  इसीलिए इन दोनों की यह धारणा थी की, अगर कोई एक इंसान कर सकता है तो आप भी उस चीज को सिख सकते है बस आपको यह बात अपने मन के भीतर माकूल(fit) करनी होती है. 

उसी दौर मे, दुनिया मे तीन ऐसे चिकित्सक थे जिन्होंने लोगों के जीवन मे अभूतपूर्व बदलाव लाए थे. जिसमे से एक थे Fritz Perls जिन्होंने Gestalt therapy विकसित की थी, दूसरे थे Virginia Satir जिन्होंने फॅमिली थेरिपी पर काम किया था और तीसरे थे Milton Erickson जिन्हे दुनिया का सबसे बड़ा हिपनोथेरिपिस्ट कहा जा सकता है. ये तीनों ऐसे थे जो लोगों के मुश्किलों को सुलझा रहे थे.

Richard और John ने इन तीनों चिकित्सकों का अध्ययन करना शुरू किया था. जिसके वजह से ही यह आज ये तकनीक इजात हुई है जिसे हम NLP नामसे जानते है.

कितना शक्तिशाली है NLP?

दुनिया मे इससे ज्यादा कोई खास विज्ञान होगा ही नहीं जो आपको अपने मन की प्रोग्रामिंग को सीखा सकता है, यानि की कैसे एक आम आदमी अपनी जिंदगी मे अभूतपूर्व बदलाव ला सकता है. ऐसा इंसान जिसका आत्मविश्वास काफी कम हो, उसको अचानक से काफी ज्यादा आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस होना. यहातक की अस्थमा जैसे बीमारी से भी बाहर आना, ये सबकुछ इस विज्ञान के लिए संभव है, जबतक की इसकी सही समझ लोगों के पास होगी.

यह एक कमाल की तकनीक है क्योंकि ये आपके न्यूरॉलॉजी पर काम करता है. आपके दिमाग के अंदर जो न्यूरॉन है, जो दिमाग मे न्यूरल रास्ते बनते है, जो आपकी जीवन मे आपका स्वभाव विकसित कर रही है. आपका रवैया विकसित कर रही है , ये उस की जड़ तक जाके काम करता है. अगर आज दुनिया मे कोई भी इंसान बदलाव ला रहा है तो यह बात पक्की है की वह इंसान न्यूरो लिंगविस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP) का इस्तेमाल कर रहा है चाहे वो प्रत्यक्ष रूप से हो या अप्रत्यक्ष रूप से.

ये वह विज्ञान है जो बड़े बदलाव लेकर आता है

आपकी दिमाग के अंदर की दुनिया को बदलकर रखने की क्षमता इस विज्ञान मे है. दुनिया दो तरीके से होती है, एक है आपकी बाहरी दुनिया और एक है आपकी अंदरूनी दुनिया, जो की होता है आपका मन. बाहरी दुनिया तो हर किसीके लिए एक जैसा होती है लेकिन फरक इस बात से पड़ता है की आपने उसके लिए, अपनी अंदरूनी दुनिया को कैसे विकसित किया किया है.

हमारा मन, चीजों को Visuals , Audios & Feelings के जरिए समझता है,

अब आप समझे होंगे की आपके अंदर की दुनिया मे इन Visuals, Audios और feelings को किस तरह से बदलना होगा जो आपकी सम्पूर्ण व्यक्तित्व को बदल दे. और कैसे बड़े बदलाव की तरफ बढ़े..

आप खुद अपने मन की प्रोग्रामिंग कर सकते है जिंदगी मे बड़े बदलाव लाने के लिए. कुछ आपके ऐसे बर्ताव होते है जो, आपके लिए या आपके अपनों के लिए सही नहीं होते, कैसे आप उन्हे बदल सकते है एक प्रासंगिक व्यवहार के साथ. कैसे आप किसी चीज मे दिलचस्पी विकसित कर सकते है जिसमे आपकी दिलचस्पी होना ही चाहिए, और जिन  चीजों मे दिलचस्पी होना नहीं चाहिए उसमे आप कैसे अपनी दिलचस्पी को आसानी से खो सकते है.

आपको अपनी एवं दूसरे लोगों के व्यक्तित्व के बारे मे समझना होगा. किसी व्यक्ति के साथ कैसे संभाषण करे की उसके ऊपर आपके संभाषण का बहोत ज्यादा प्रभाव पड़े, यह बात आपको समझनी होगी. आपकी भाषा दूसरों को कितना सम्मोहित करती है यह आपको देखना होगा. आपको अपने मन को इस तरह बनाना होगा की यह विज्ञान आपको मदत करे.

कहा है इसका ट्रैनिंग सेंटर?


जी हाँ, कोई भी इंसान का, कुछ इस प्रकार से ही आपकी तरफ देखने का मन होगा अगर आपके मन मे यह सवाल आया हो “कहा है इसका ट्रैनिंग सेंटर?“. इसका कारण यह है की आपको जिंदगी मे हर चीज सीखने या समझने के लिए कोचिंग क्लास लगाने की जरूरत नहीं होती. अगर आप अपने ही मन को सीखने के लिए किसी दूसरे के पास जाओगे तो.. ऐसा कैसे चलेगा?

इस सूचना की दुनिया मे जिसे हम information era बोलते है, यह आपको ज्यादातर चीजे घर बैठे ही समझने की सहूलत देती है. गौरतलब है की किसी विशेषज्ञ से सीखना भी कोई बुरी बात नहीं. लेकिन यहा बात आपके मन की, आपके भावनाओ की है, आपको इस बात का ध्यान रखना होगा.

अगर आप हर एक चीज बाहरी शिक्षक से समझने की सोच रखते है तो आप एक महान शिक्षक को नाराज कर रहे होते है, और वो महान शिक्षक कोई और नहीं आप खुद हो, अपने खुद के बारे मे आपसे बढ़कर कौन जाने? अगर ऐसा है तो बहोत अच्छी बात है. लेकिन ऐसा तब ही होता है, जब कोई आपसे बेइंतेहा प्यार करे, लेकिन क्या हर कोई आपके साथ ऐसा कर सकता है?

आशा है की आपको यह समझ आया होगा की अपने Visuals , Audios & Feelings का सही इस्तेमाल करके अपने जीवन मे बड़ा बदलाव ला सकते है. हम आपके लिए रोज ऐसही अच्छे लेख लेकर आते है. अगर आपको यह लेख पसंद आता है तो फेसबुक और व्हाट्सएप पर अपने दोस्तों को इसे फॉरवर्ड करना ना भूले. साथ ही हमारी वेबसाइट को रोजाना भेंट दे.


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© सागर वझरकर
एस सॉफ्ट ग्रुप इंडिया

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