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30th August: grief awareness diwas | शोक जागरूकता दिवस

grief awareness diwas :  आज हम  30 अगस्त को शोक जागरूकता दिवस मनाने जा रहे हैं. कभी-कभी दिल के किसी कोने में बहुत काला और घना अंधेरा छुपा हो सकता है. और यह शायद आपके बीते हुए कल के दुख होगा या फिर शोक का काला अंधेरा हो सकता है.

इसे जानीये, पहचानिए और हो सके तो अपने दोस्त या फिर किसी चहेते के साथ साझा कीजिए. क्योंकि शोक जागरूकता दिवस के माध्यम से ही आप यह बात थोड़ी आसानी के साथ कर सकते हैं. इसके लिए आपको अपने चारों ओर जो भी मदद करने लायक व्यक्ति हैं, उनकी खोज करनी होगी. और शोक जागरूकता दिवस हमें ऐसे ही लोगों के साथ जुड़ने की उम्मीद देता है.

इसका कोई निर्धारित पाठ्यक्रम नहीं होता. लेकिन जब आपके जानने वालों में से कोई अगर आपको छोड़कर चला जाए. तो उसके बाद आपकी या फिर आपके चेहरे के जीवन में जो उनकी कमी रहती है. उसी से सभी लोग प्रभावित होते हैं. आप ऐसे लोगों की खोज करते हुए उन्हें जितना हो सके उतनी मदद दे. उन्हें उनके जीवन में हुए नुकसान की समझ लें.

उन्हें आश्रय दे. उनकी दिनचर्या में जो भी आवश्यक परिवर्तन आसानी से समायोजित कर सकते हैं, उन्हें करते जाए. और उन्हें अन्य नई दिनचर्या से परिचित करने का प्रयत्न करें. ताकि वह अपने शोक या फिर दुख को थोड़ा कम कर सकें.

grief awareness diwas ka itihas

शोक जागरूकता दिवस पर हमें इसके इतिहास के बारे में भी जानना जरूरी होगा. शोक जागरूकता दिवस एंजी कार्टराइट ने 2014 में इस दिवस की स्थापना की थी. कार्ट राइट भी अपने साथियों के नुकसान से परिचित थे. और वह भी उनके दुख में खो गए थे. उन लोगों के लिए समर्थन करने की कोशिश कर रहे थे और उस में समर्पित हो जाए. ऐसे कुछ पीड़ित लोगों के लिए उन्होंने ग्रीफ अवेयरनेस दिवस अर्थात शोध जागरूकता दिवस का निर्माण किया. और इस दिवस को खुद लोगों की सोच की वास्तविकता के बारे में बताने लगे.

जिन्हें जिंदगी में हुआ है उनके भी मन को तसल्ली देने के लिए इस दिवस का महत्व उन्होंने लोगों के ध्यान में लाया. वास्तव में इस दिवस का महत्व समझाने के लिए कि लोगों को इससे कैसे मदद मिलेगी. और आपको किस तरह के दुख का सामना करना पड़ सकता है. कभी कभी दुख समझना भी बहुत कठिन कैसे हो जाता है. इन सभी विषयों को लेकर दिवस का इतिहास बनता है. यह दिवस आमतौर पर किसी के नुकसान के जवाब पर निर्धारित होता है.

गौतम बुद्ध ने भी ऐसे दुख के बारे में शौक के बारे में बहुत सी जानकारी दी. और कुछ जानकारियां को तो अभी इस दिवस का आसानी से स्वागत कर सकते हो. इस दिवस की वास्तविकता दुख में ही होती है और इसी वजह से दुख से निपटने वाले साथियों की मदद आप जरूर ले सकते हैं.  उन्हें भी कुछ मदद जरूर कर सकते हैं. वह आपकी इस मदद को कभी नहीं भूल पाएंगे.

आप देख सकेंगे कि प्रत्येक व्यक्ति का स्वभाव अलग अलग होता है. उनके दुखों का मुकाबला करने का तरीका भी विभिन्न चरणों से होकर गुजरता है. यह जानकारी आप अपने तरीके से इकट्ठा करते हुए इस दिवस को मनाने का एक अच्छा प्रयास कर सकते हैं.

grief awareness diwas kaise manaye

शोक जागरूकता दिवस मनाने के लिए आपको लोगों की हर संभव मदद करनी होगी. आप सोच सकते हैं कि जीवन की सर्वाधिक सच्चाई आखिर किसी व्यक्ति को खो देने के बाद ही पता चलती है. जिसे हम बहुत प्यार करते थे. एक और सच्चाई के साथ इसका अनुमोदन कर सकते हैं. इस दिवस पर होने वाला नुकसान तो अद्वितीय ही होता है.

इसका किसी के साथ कोई संबंध नहीं होता हर एक व्यक्ति को होने वाला नुकसान अलग अनुभव कराता है. इस दिवस पर आप दुखी और शोक में डूबे लोगों की वास्तविकता समझते हुए उनकी उदासी का कारण जान ले. वैसे तो इन पलों से निपटना बहुत कठिन होता है. लेकिन फिर भी आप उन्हें नई चीजों को याद दिला कर उनकी मदद करने की कोशिश करें. वे लोग अपने दुख को शायद कभी ना भूल सकें. लेकिन फिर भी आप उन्हें आगे बढ़ने की और सामान्य होने में सक्षम करने की मदद जरूर करें.

आप अपने दोस्तों को सुनाने के लिए कुछ प्रस्ताव दे सकते हैं. या फिर बने अपने घर या कहीं बाहर घूमने जाने के लिए भी साथ ले जा सकते हैं. चाय या कॉफी पर भी अपने दोस्तों को बुला सकते हैं. अगर आपको किसीसे से मदद मांगना ठीक नहीं लग रहा होगा. किसी को आपके अपने दुख के बारे में बताना उचित नहीं होगा. तो आप अकेले नहीं हो यह लाजमी बात होती है.

दुख जागरूकता दिवस की रिकवरी प्रक्रिया : 

जब भी हम दुख जागरूकता दिवस के बारे में बात करते हैं. तो हमें भी इस दिवस के सम्मान के लिए कार्य करना जरूरी होता है. आइए हम जाने कि इसे कैसे समझें. दुख की अपनी एक रिकवरी प्रक्रिया होती है. कई लोग इस गलती को मानते हैं कि दुख के 5 चरण होते हैं. 

1.  इनकार अर्थात Denial,  

2.  क्रोध अर्थात anger, 

3.  सौदेबाजी अर्थात Bargaining, 

4.  अवसाद याने की Depression और  

5.  स्वीकृति याने की Acceptance 

हालांकि ये भावनाएं सामान्य होती है. लेकिन दुख की वसूली के दौरान उनके नुकसान की एक विस्तृत श्रृंखला का आपको अनुभव होता है. और कई अन्य भावनाएं भी इसमें शामिल होते हैं कि जैसे चिंता अपराध, बोध, जलन, शर्म, प्रशंसा और अनिश्चितता भी शामिल होती है. यह तो हुई मन की भावनाएं! लेकिन लोगों में भावनाओं की वजह से शारीरिक लक्षणों में भी बदलाव अनुभव किए जा सकते हैं. इसमें नींद के पैटर्न में बदलाव बहुत भारी होता है.

साथ ही वजन में बदलाव आता है. सिर दर्द, सर्दी, जुखाम और अन्य संक्रमण की संभावनाएं भी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. दुख के अलग-अलग लक्षणों के अनुसार दिन में कुछ हफ्तों में या फिर कुछ महीनों के बाद भी दिखाई दे सकते हैं. इस पर उपाय तो एक ही होता है. आपको दुखी आदमी के साथ कोमलता से पेश आना चाहिए. प्रेम भाव दिखाना चाहिए. उसे दुख का निवारण विशेषज्ञ की सहायता से खुद के मन को समझ लेना चाहिए. शायद यह उसकी लिए आराम का एक बड़ा स्रोत हो सकता है.

दुख जागरूकता दिवस के मौके पर आप किसी भी सहायता समूहों को या फिर शैक्षिक सामग्रियों को अपने स्वयं के व्यक्तिगत अनुभव की लिंक साझा करते हुए लोगों में उसके बारे में बात बता सकते हैं. जब कोई भी अपने जीवन के दुख के प्रभाव के बारे में बात करता है, तो यह शोक का अनुभव उनकी पीड़ा को कम करने में मदद करता है. यदि आप किसी ऐसे व्यक्तियों को जानते हैं, जिन्हें हाल ही में ऐसा कुछ नुकसान हुआ है. उन्होंने अपने प्रिय जनों को खो दिया है, तो आप उन तक पहुंच कर उनसे बात जरूर कर सकते हैं. क्योंकि जब बात दुख कम करने की आती है.

तो उसके लिए सबसे अच्छी दवा यही होती है कि आपको अपनी यादों और भावनाओं को साझा करने के लिए कोई सुरक्षित स्थान मिलना चाहिए. और जज्बाातों को अपनी दिल की बातों को किसी के साथ साझा कर सको. तो उस दुख की तीव्रता शायद कम हो सकती है. फिर चाहे वह दुख 50 साल पहले का हो या फिर हाल ही में हुआ हो. इससे आपको कोई फर्क नहीं पड़ता.

 हमारा  grief awareness diwas  पर आधारित लेख पसंद आ गया हो और आपको भी किसीसे अपना दुख साझा करने में आसानी हुई है, तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में comment करके हमें जरूर बताएं!


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