जानें लॉकडाउन के दौरान हमारे वातावरण को क्या हुआ फायदा…

क्या आपने कभी गौर किया है कि यदि इसी तरह हम और अधिक समय तक लॉकडाउन में रहें तो हमारे पर्यावरण के लिए क्या फायदे हो सकते हैं? कोई भी इसका जवाब यही देगा की हवा साफ होगी, पानी शुद्ध होगा और पृथ्वी पर वर्षों तक हमने पर्यावरण के खिलाफ जो खिलवाड़ की है, वह भरने के लिए थोड़ी सी मदद होगी.बाद की बात छोड़िए; लेकिन लॉकडाउन के दौरान भी हमें पर्यावरण के प्रति कुछ फायदे देखने को मिले हैं. आइए उन्हींपर एक नजर डालते हैं.

1. गंगा नदी का पानी पीने के लिए पर्याप्त तौर पर स्वच्छ है.

प्राचीन काल से अपनी पवित्रता और विभिन्न कायाकल्प योजनाओं के बावजूद भी गंगा नदी एक गंभीर प्रदूषित नदी बनी रही. लेकिन पिछले एक महीने से चल रहे लॉकडाउन की वजह से लगभग सभी उद्योग बंद हैं, इसी कारण नदी में किसी भी तरह का प्रदूषित पानी नहीं आ रहा है. साथ ही नदी के अलग-अलग घाटों पर भी लोगों की गतिविधियां कम हो गई है; इसीलिए गंगा नदी का पानी अब पहले से कहीं और ज्यादा स्वच्छ है. हरिद्वार में भी नदी के तट पर प्रसिद्ध ‘हर की पौड़ी’ घाट का पानी पीने लायक स्वच्छ घोषित किया गया है. इसी तरह वाराणसी में भी कारखाने बंद होने की और सार्वजनिक घाटों पर स्नान या फिर अन्य कामों के लिए घाट का उपयोग न होने की वजह से नदी के पानी में 40 से 50% सुधार हुआ है.

2. यमुना नदी सफेद झाग भरे पानी से मुक्त है.

हम सभी ने छठ पूजा के दौरान भक्तों को यमुना नदी के विष भरे झाग के लगभग अदृश्य पानी में डुबकी लगाते हुए कई बार देखा होगा. लेकिन अब आपको भरोसा नहीं होगा कि लगभग एक महीने के दौरान ही यमुना के इस विषैले रूप में बहुत ज्यादा अच्छा फर्क महसूस हो रहा है. इसका मतलब पिछले 30 वर्षों में नदी में औद्योगिक प्रदूषण की वजह से जो हानि हुई थी उसमें सिर्फ 30 दिनों में ही बहुत ज्यादा कमी आई है.

3. दिल्ली, मुंबई, बीजिंग, बैंकॉक, लास एंजिल्स जैसे शहर अब सांस लेने लगे हैं.

कई देशों में, पिछले महीने में, लॉकडाउन के कारण अधिकांश मानव गतिविधियों पर अंकुश लगने की वजह से बहुत राहत मिली है. हवाई यात्रा, सड़क यातायात में कमी के कारण प्रदूषण के स्तर में भी भारी गिरावट देखी गई है, जिसमें इटली, फ्रांस, अमेरिका, यूनाइटेड किंग्डम, भारत, चीन, कोलंबिया, ब्राजील जैसे बड़े देश शामिल हैं. एक अनुमान अनुसार, अकेले चीन में ही वायु प्रदूषण में गिरावट के कारण 77,000 से अधिक लोगों की जान बच गई है. लास एंजिल्स में 1980 के बाद सबसे अच्छी हवा पाई गई है.

4. आप पंजाब से हिमालय को देख सकते हैं.

यह पढ़कर आपको शायद सच ना लगे लेकिन 30 वर्ष में पहली बार पंजाब के जालंधर के निवासियों ने 200 किलोमीटर दूर स्थित बर्फ़ीली धौलाधार रेंज को देखा, जो कि पूरी तरह हिमाचल प्रदेश में बसी हिमालय पर्वत की ही पहाड़ियां है.

5. मनुष्य घर के अंदर, वन्य जीव बाहर.

वेल्स में बकरियां, पेरिस में बत्तख और मुंबई में मोर अपने-अपने घरों से और जंगलों से बाहर आकर घूमने लगे हैं. दुनिया भर में कई जगहों पर ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां पर वन्य वन्यजीव अपरिचित शांति का लाभ उठाकर रास्तों पर भटक रहे हैं.

6. पृथ्वी थोड़ी कम हिल रही है.

कई देशों के लॉकडाउन के चलते पृथ्वी पर लोगों की आवाजाही और यातायात के माध्यम से हो रहे कंपन में कमी महसूस की गई है. इसी कारण अत्यंत छोटे-छोटे भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों की निगरानी करने में वैज्ञानिकों को ज्यादा परेशानी नहीं आ रही है. साथ ही वेधशालाओं के उपकरण अत्यंत संवेदनशील तरीके से काम करने लगे हैं, इसलिए वैज्ञानिक इन सभी बातों का अपने काम मे अच्छी तरह से उपयोग कर रहे हैं और अपने शोधकार्यों में अच्छी तरह ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

7. समुद्री जीवन भी ठीक हो रहा है.

मछली पकड़ने के बड़े-बड़े ट्रॉलर और जहाज एक जगह खड़े किए गए हैं. साथ ही होटल और रेस्तरां बंद होने के कारण सीफूड की वैश्विक मांग में कटौती आई है. इसके परिणामस्वरूप समुद्री जीवन में बहुत ज्यादा सुधार देखा जा सकता है. हालांकि डाटा संकलन प्रक्रिया अभी जारी है; लेकिन यह भी सच है कि डॉल्फिन और सील उन जगहों पर भी दिखने लगी हैं, जहां उन्हें वर्षों से नहीं देखा गया था. प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भी इसी तरह के सुधार देखे गए थे.

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© संतोष साळवे
एस सॉफ्ट ग्रुप इंडिया

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Shayari Sukun
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