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28 March अर्थ अवर (Earth Hour)

अर्थ अवर
Earth Hour 2020 Theme : “Climate Action”

दोस्तों, २८ मार्च एक अर्थ अवर है, हमारे आज के इस बदलते हुए समय में बिजली का जितना महत्व है, शायद ही उतना किसी दूसरी चीज का होगा. यह हमारी आवश्यकता ही नहीं अपितु रोजमर्रा की जिंदगी का एक भाग हो चुकी है. यह हमारे जीवन का इतना बड़ा हिस्सा बन गई है कि हम इसके बिना एक पल की भी कल्पना नहीं कर सकते.

अगर इस बात पर आपको जराभी संदेह है कुछ सवालों के जवाब मन में सोचकर बतायें. जरा सोचिये, अपने सेल फोन, टीवी या रेफ्रिजरेटर के बिना आपके जीवन की कल्पना कैसी होगी? कल्पना कीजिये, आपको अपने सभी कपड़ों को बिना मशीन के, हाथ से धोने के लिए गर्म पानी चाहिए तो आप इसके लिए हर बार चूल्हा जला रहे है, या अंधेरा होते ही बिस्तर पर जाने के लिए आपको मोमबत्ती की रोशनी का सहारा ले रहे है.

Earth Hour
28 March, Earth Hour

क्या यह कल्पना भी आप कर सकते है? इसका उत्तर ‘ना’ ही होगा…!! लेकिन इससे पहले परिस्थिति ऐसी नहीं थी. सब लोग प्रातः ही बिना किसी अलार्म की मदद से उठकर अपने काम पर निकल जाते थे.

सूरज ढ़लतेही खुद होकर वापस आते ही खाना खाकर सो जाते थे. बिना मोबाइल के, चिट्ठी लिखकर सन्देश को एक दूसरे तक पहुंचाने में भी एक अलग आनंद की अनुभूति होती थी.

हम जानते है की, हर चीज की एक कीमत होती है, और यह स्पष्ट होता है कि जितना हो सके हम सभी के जीवन को आसान बना रहे है, लेकिन इस आसानी के कारण हम खुद ही हमारे जिंदगी को खतरे में भी डाल रहे है. इसलिए हम सभी का यह कर्तव्य है की किस तरह हमारे ग्रह को हम कुछ मदद कर सकते है इसके बारे में गमे हर वक्त सोचना चाहिए.

Earth Hour का इतिहास

वैज्ञानिको ने 2004 में इंसानों के हस्तक्षेप के कारण पृथ्वी पर हो रहे बुरे बदलाव के बारे में कुछ गंभीर निष्कर्ष निकले थे. इन्ही निष्कर्षों से चिंतित, ऑस्ट्रेलिया के वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ने सिडनी में एक विज्ञापन एजेंसी के साथ “जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर ऑस्ट्रेलियाई लोगों के विचार” पर चर्चा की.

साथ ही उन्होंने 2006 में बड़े पैमाने पर कुछ देर तक बिजली के स्विच ऑफ के विचार को आगे बढ़ावा दिया और इसे “द बिग फ्लिक” का नाम देकर अपने इस अतुलनीय विचार को वास्तविकता में लाने का फैसला किया.इस महत्वपूर्ण काम में अपना योगदान देने के लिए सिडनी के मेयर ने हर इंसान के बिजली की लागत के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद की और लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाया.  

इसका परिणाम यह हुआ की लोगो की अर्थ अवर के बारे में रूचि बढ़ी और 31 मार्च को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में शाम 7:30 बजे पहली बार अर्थ अवर आयोजित किया गया. जल्द ही, यह बात भी फैल गयी कि अक्टू. 2007 में सैन फ्रांसिस्को एक “लाइट्स आउट” कार्यक्रम चलाने वाला अगला प्रमुख शहर होगा.

यह आयोजन एक बहुत बड़ी सफलता थी और इस बात ने जल्द ही बहुत सारे सकारात्मक मीडिया कवरेज को प्राप्त कर लिया. इस तरह, 2008 तक दुनिया के सभी सात महाद्वीपों के 35 देश इसमें भाग ले चुके थे. और इस तरह, इन 35 देशों के सैकड़ों शहरों ने रात 8 से 9 बजे के बीच अपनी रोशनी बंद कर के दुनिया को यही सन्देश दिया की अर्थ अवर के जरिये हमे शाश्वत विकास के साथ ही प्रकृति को किसी भी तरह की बर्बादी से बचाना है, तभी इस पृथ्वी पर हमारा बच पाना मुमकिन है.

दुनिया को एकसाथ लाने वाली इस जागतिक घटना में कुछ सबसे प्रसिद्ध स्थलों ने भी भाग लिया था, जिसमें ओपेरा हाउस (सिडनी, ऑस्ट्रेलिया), एम्पायर स्टेट बिल्डिंग (न्यूयॉर्क, USA), राष्ट्रीय स्मारक (जकार्ता, इंडोनेशिया), गोल्डन गेट ब्रिज (सैन फ्रांसिस्को, यूएस), टेबल माउंटेन ( केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका), सात अजूबों में एक ग्रेट कोलोसियम (रोम, इटली), अज्रीली सेंटर (तेल अवीव, इज़राइल), रॉयल कैसल (स्टॉकहोम, स्वीडन), सीएन टॉवर (टोरंटो, कनाडा), एसएम साइंस डिस्कवरी सेंटर (मनीला, फिलीपींस) , पेट्रोनास टावर्स (कुआलालंपुर, मलेशिया), केएल टॉवर (कुआलालंपुर, मलेशिया), लंदन सिटी हॉल (लंदन, इंग्लैंड), और ऐसे ही कई जगहों पर अर्थ अवर मनाया गया. इस तरह 2016 में इस घटना में भाग लेने वाले देशों की संख्या बढ़कर 170 हो गई. कई बड़ी बड़ी हस्तियों ने भी इसके आयोजन के लिए अपना समर्थन दिया, जिनमें लियोनेल मेस्सी, अल गोर, योको ओनो और नेल्सन मंडेला भी शामिल हैं.

अर्थ अवर कैसे मनाएं

हर देश में इसे किसी उत्सव जैसा मनाया जाना चाहिए तभी यह हमारे लिए अधिक लाभप्रद होगा. इस उत्सव को मानाने के लिए हमे पृथ्वी की सम्पूर्ण बिजली को एक घंटा बंद करना है. यही अर्थ अवर मनाने का सबसे अच्छा तरीका है. हालांकि, आपको यह भी याद रखना चाहिए कि अर्थ अवर केवल एक घंटे के लिए नहीं, बल्कि हमारे ग्रह के बारे में हर साल के दूसरे दिन हर दूसरे घंटे की देखभाल के लिए भी है!

साथ ही हमे इस बात को जरूर ध्यान में रखना चाहिए की अर्थ अवर के दौरान दुनिया भर में बचाई जाने वाली हजारों एमएचवी ऊर्जा का मतलब यह नहीं की दूसरे वक्त हम चाहे जितनी बिजली का उपयोग करें. अगर हम पर्यावरण की देखभाल करना जारी नहीं रखते हैं तो यह बचाया हुआ एक घंटा भी ज्यादा उपयोग का नहीं है.

हमे इस बारे में जरूर सोचना चाहिए कि ऊर्जा बचाने के लिए हम दैनिक आधार पर क्या कर सकते हैं – यहां तक कि बिजली की बचत के लिए अपने नियमित प्रकाश बल्बों को बदलकर हमे कम खपत वाले बल्ब उपयोग में लाना चाहिए. इससे बहुत मात्रा में बिजली बचत हो सकती है, क्योंकि यह काम आसान भी है और बहुत सारे लोग मिलकर एक ही बार में इसे कर सकते हैं. हमे यह जान लेना चाहिए की यह एक घंटा जो अर्थ अवर है, आपको शेष वर्ष के 8,760 घंटो के लिए दुनिया को जीने के लिए बेहतर जगह बनाने में प्रेरित करता है!

अर्थ अवर के प्रति हमारी जिम्मेदारी

आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं रहा, जहाँ बिजली का उपयोग न होता हो. ऐसे मे अर्थ अवर के प्रति हमारी जिम्मेदारी बहोत ज्यादा बढ़ चुकी है. हमारी पृथ्वी पर भी इसका बहोत गहरा और बुरा असर हो रहा है.

इसीलिए बिजली का एक मर्यादा में और सही इस्तेमाल करने मे ही हम सब की भलाई है. तो आइये हम सब अर्थ अवर मनाकर इस जिम्मेवारी को निभाने की ओर एक कदम आगे बढ़ाए और पृथ्वी को बचाने में हमारा सहयोग दे!

हमारा यह लेख पूरा पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! हम आपके लिए रोज ऐसेही अच्छे लेख लेकर आते है. तो हमारे साथ बने रहे और इस वेबसाइट को हररोज भेंट दे.

© संतोष साळवे
एस सॉफ्ट ग्रुप इंडिया